नई दिल्ली: ऑफिस हो, घर हो या दोस्तों की बैठक—इन दिनों एक सवाल लगातार चर्चा में है: क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI इंसानों की नौकरियां ले लेगा? यह चिंता सिर्फ एंट्री लेवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। सीनियर पदों पर काम कर रहे प्रोफेशनल्स के बीच भी यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि अगर AI इंसानों की तुलना में काम को ज्यादा तेजी से और कम लागत में कर सकता है, तो आने वाले समय में इंसानों और उनकी नौकरियों का क्या होगा?
इस सवाल का फिलहाल कोई एक स्पष्ट जवाब नहीं है। लेकिन इतना जरूर है कि AI अब भविष्य की तकनीक भर नहीं रह गया है। यह हमारी रोजमर्रा की जिंदगी और कामकाज का हिस्सा बन चुका है।
मोबाइल फोन, बैंकिंग, ऑनलाइन शॉपिंग, सोशल मीडिया, हेल्थकेयर और मनोरंजन जैसे तमाम क्षेत्रों में AI का इस्तेमाल हो रहा है। कंपनियां डेटा का विश्लेषण करने, ग्राहकों की पसंद समझने, धोखाधड़ी पकड़ने, कंटेंट तैयार करने और कई तरह के कामों को ऑटोमेट करने के लिए AI का इस्तेमाल कर रही हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि AI का असर सिर्फ नौकरियां खत्म करने तक सीमित नहीं रहेगा। इससे नई तरह की नौकरियां और करियर के नए अवसर भी पैदा होंगे।
जनवरी 2026 में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की एक रिपोर्ट में LinkedIn के डेटा के हवाले से बताया गया कि AI के कारण दुनिया भर में लाखों नई नौकरियां बनी हैं।
ऐसे में अगर 12वीं पास करने के बाद कोई छात्र AI के क्षेत्र में करियर बनाना चाहता है, तो उसके सामने कई विकल्प मौजूद हैं। सही कोर्स और विशेषज्ञता के साथ AI, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, बिजनेस एनालिटिक्स और साइबर सिक्योरिटी जैसे क्षेत्रों में करियर बनाया जा सकता है।
आखिर AI है क्या और यह कैसे काम करता है?
AI को समझने के लिए रोजमर्रा की जिंदगी के कुछ उदाहरण काफी हैं। आपका स्मार्टफोन चेहरा पहचान लेता है, स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म आपकी पसंद के हिसाब से फिल्म या वेब सीरीज सुझाता है और कई आधुनिक गाड़ियां ड्राइवर की मदद के बिना कई काम करने में सक्षम हैं।
इन सभी तकनीकों के पीछे AI की भूमिका है।
शिव नाडर यूनिवर्सिटी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट के हेड प्रोफेसर आकाश सिन्हा AI को आसान भाषा में समझाते हुए कहते हैं कि AI ऐसी तकनीक है, जिसमें मशीन या कंप्यूटर में ऐसी क्षमताएं विकसित की जाती हैं, जिससे वह कुछ काम इंसानों की तरह सोच-समझकर करने में सक्षम हो सके।
उनके मुताबिक, रोजमर्रा की जिंदगी में जहां भी हम कंप्यूटर या मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं, वहां किसी न किसी रूप में AI काम कर रहा है।
मसलन, जब कोई व्यक्ति YouTube खोलता है तो उसके सामने कौन-सा वीडियो आएगा, यह तय करने में AI एल्गोरिदम की भूमिका होती है। सोशल मीडिया पर कौन-सी पोस्ट दिखाई जाएगी, कौन-सा विज्ञापन दिखेगा या बैंकिंग लेनदेन में धोखाधड़ी की आशंका कहां है—इन सबका विश्लेषण भी AI की मदद से किया जा सकता है।
AI सिस्टम डेटा से लगातार सीखते हैं और समय के साथ उनके प्रदर्शन में सुधार हो सकता है। यही वजह है कि अब AI को कई तरह के कामों के विकल्प के रूप में भी देखा जाने लगा है।
AI से डरने के बजाय इसे सीखने की जरूरत
दिल्ली स्थित टेक पॉलिसी फोकस्ड थिंकटैंक आईएसआईए सेंटर की डायरेक्टर और AI विशेषज्ञ मेघना बल का कहना है कि AI उन लोगों के लिए जरूरी नहीं कि खतरा ही हो, जो खुद को लगातार अपडेट रखते हैं।
उनके मुताबिक, AI उन लोगों के लिए अवसर बन सकता है जो तकनीक को समझते हैं और उसके साथ काम करना सीख लेते हैं।
मेघना बल का कहना है कि AI से जुड़े कुछ बुनियादी कोर्स हर व्यक्ति के लिए उपयोगी हो सकते हैं। इनमें से कई कोर्स सरकार के SWAYAM पोर्टल के जरिए मुफ्त में भी किए जा सकते हैं।
इसके अलावा Generative AI के टूल्स का इस्तेमाल कैसे किया जाए, इसकी बुनियादी समझ भी लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है।
वह मशीन लर्निंग के बेसिक कॉन्सेप्ट, Applied Machine Learning, AI Applied on Business and Data Analytics और AI से जुड़े Product and Strategy Management जैसे कोर्स को उपयोगी मानती हैं।
इन कोर्स के जरिए यह समझने में मदद मिल सकती है कि मशीन लर्निंग किस तरह काम करती है, डेटा को कैसे संभाला जाता है और बिजनेस या प्रोडक्ट से जुड़े फैसलों में AI का इस्तेमाल किस तरह किया जा सकता है।
वहीं AI और साइबर सिक्योरिटी का संबंध समझने वाले स्पेशलाइज्ड कोर्स इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले छात्रों के लिए उपयोगी हो सकते हैं। साइबर सिक्योरिटी और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्र भी इंजीनियरिंग करियर को आगे बढ़ाने के अवसर दे सकते हैं।
AI में करियर बनाना है तो ये 5 कोर्स हो सकते हैं विकल्प
अगर कोई छात्र या प्रोफेशनल AI को ही अपने करियर का मुख्य क्षेत्र बनाना चाहता है, तो प्रोफेसर आकाश सिन्हा के मुताबिक कुछ कोर्स मजबूत विकल्प हो सकते हैं।
1. MBA/PG Diploma in AI and Business Analytics
यह कोर्स उन छात्रों और प्रोफेशनल्स के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है, जिनकी रुचि बिजनेस, मैनेजमेंट, कॉमर्स, AI स्ट्रैटेजी, एनालिटिक्स और प्रोडक्ट मैनेजमेंट में है।
IIMs, Indian School of Business और UpGrad या Great Learning जैसे एडटेक प्लेटफॉर्म से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए इस दिशा में पढ़ाई की जा सकती है।
इन कोर्स की फीस संस्थान और कार्यक्रम के आधार पर करीब 2.5 लाख से 7 लाख रुपये तक हो सकती है। वहीं कोर्स के बाद संभावित सालाना सैलरी करीब 6 लाख से 20 लाख रुपये तक हो सकती है। हालांकि वास्तविक वेतन संस्थान, कंपनी, अनुभव, भूमिका और उम्मीदवार की क्षमता पर निर्भर करेगा।
2. ऑनलाइन AI Certificate Program
AI की शुरुआती समझ विकसित करने के लिए ऑनलाइन Certificate Programs भी विकल्प हो सकते हैं।
Udacity और दूसरे ऑनलाइन एडटेक प्लेटफॉर्म पर इस तरह के कई कार्यक्रम उपलब्ध हैं। प्रोफेसर सिन्हा के मुताबिक, ऐसे कुछ कार्यक्रमों की फीस करीब 1.5 लाख रुपये के आसपास हो सकती है।
यह विकल्प उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है, जो शुरुआत से AI को समझना चाहते हैं और अपनी सुविधा के अनुसार पढ़ाई करना चाहते हैं।
ऐसे कोर्स के बाद सालाना 10 लाख रुपये तक की सैलरी की संभावना बताई गई है, हालांकि यह पूरी तरह व्यक्ति की स्किल, अनुभव और नौकरी की भूमिका पर निर्भर करेगी।
3. MCA/MTech in AI and Machine Learning
जो छात्र AI और मशीन लर्निंग में मजबूत तकनीकी विशेषज्ञता हासिल करना चाहते हैं, उनके लिए MCA या MTech जैसे प्रोग्राम बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
IITs, NITs, IIITs और कई अन्य प्रमुख विश्वविद्यालयों में AI और मशीन लर्निंग से जुड़े कार्यक्रम उपलब्ध हैं। इसके अलावा IITs में AI से संबंधित कुछ शॉर्ट टर्म और क्रैश कोर्स भी संचालित किए जाते हैं।
मास्टर्स स्तर के इन कोर्स की फीस संस्थान के अनुसार करीब 1 लाख से 10 लाख रुपये प्रति वर्ष तक हो सकती है।
कोर्स पूरा करने के बाद सालाना 22 लाख रुपये तक के पैकेज की संभावना बताई गई है। हालांकि यहां भी वास्तविक सैलरी कई कारकों पर निर्भर करती है।
4. BSc/BTech in AI and Data Science
जो छात्र 12वीं के बाद ही AI के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करना चाहते हैं, उनके लिए BSc या BTech in AI and Data Science एक विकल्प हो सकता है।
Delhi Technological University, Vellore Institute of Technology, Amity University, St. Xavier’s College, NITs और दूसरे संस्थानों में AI और Data Science से जुड़े कार्यक्रम उपलब्ध हैं।
पूरे कार्यक्रम की फीस संस्थान के आधार पर करीब 1 लाख से 20 लाख रुपये तक हो सकती है। वहीं संभावित शुरुआती सालाना सैलरी करीब 6 लाख से 18 लाख रुपये तक बताई गई है।
यह कोर्स उन छात्रों के लिए उपयोगी हो सकता है जो ग्रेजुएशन के दौरान ही AI और डेटा साइंस में विशेषज्ञता हासिल करना चाहते हैं।
5. AI Bootcamp और Industry Programs
अगर कोई प्रोफेशनल अपना करियर बदलना चाहता है या मौजूदा नौकरी के साथ AI की स्किल हासिल करना चाहता है, तो AI Bootcamp और Industry Programs एक विकल्प हो सकते हैं।
IIT Madras, IIT Bombay और कई निजी संस्थानों में इस तरह के कार्यक्रम उपलब्ध हैं।
इनकी फीस करीब 1 लाख से 3.5 लाख रुपये तक हो सकती है। कोर्स पूरा करने के बाद संभावित पैकेज 6 लाख से 18 लाख रुपये या उससे अधिक हो सकता है।
इस तरह के कार्यक्रम खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकते हैं, जो पहले से किसी क्षेत्र में काम कर रहे हैं और AI की मदद से अपनी मौजूदा स्किल को अपग्रेड करना चाहते हैं।
सीनियर AI प्रोफेशनल्स की सैलरी 40 लाख रुपये तक
प्रोफेसर आकाश सिन्हा के मुताबिक, अनुभव और विशेषज्ञता बढ़ने के साथ AI से जुड़े सीनियर रोल में सालाना 25 लाख से 40 लाख रुपये या उससे अधिक की सैलरी मिल सकती है।
खासतौर पर बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े टेक हब और ग्लोबल टेक कंपनियों में AI से जुड़े विशेषज्ञों की मांग अधिक हो सकती है।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि किसी भी कोर्स को करने के बाद तय सैलरी की गारंटी नहीं होती। वेतन व्यक्ति की स्किल, अनुभव, संस्थान, कंपनी, जॉब प्रोफाइल और इंडस्ट्री की मांग पर निर्भर करता है।
क्या AI 30 करोड़ नौकरियों को रिप्लेस कर सकता है?
AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ नौकरियों पर इसके असर को लेकर चिंता भी बढ़ रही है।
इनवेस्टमेंट बैंक Goldman Sachs की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि Generative AI के कारण वर्ष 2030 तक दुनिया भर में करीब 30 करोड़ फुल-टाइम नौकरियां रिप्लेस हो सकती हैं।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि भविष्य में इंसानों के लिए काम ही नहीं बचेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां अनुभव, विशेषज्ञता, मानवीय संवेदनशीलता और व्यक्तिगत संपर्क की जरूरत होती है। इन क्षेत्रों में AI का इस्तेमाल बढ़ सकता है, लेकिन इंसानों की भूमिका को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं होगा।
किन नौकरियों को AI के लिए रिप्लेस करना मुश्किल होगा?
मेघना बल के मुताबिक, नर्स, हेल्थकेयर प्रोफेशनल, फिजियोथेरेपिस्ट, साइकोलॉजिस्ट और शिक्षक जैसे पेशों में मानवीय संपर्क बेहद महत्वपूर्ण है।
उनका कहना है कि लोग सिर्फ ऑटोमेटेड जवाबों से हमेशा संतुष्ट नहीं होंगे। कई परिस्थितियों में इंसान की समझ, संवेदना और व्यक्तिगत जुड़ाव जरूरी रहेगा।
इसी तरह Creative Director, लेखक और Content Strategist जैसे पेशों में भी AI एक मददगार टूल की भूमिका निभा सकता है। लेकिन जहां क्रिटिकल थिंकिंग, मौलिक विचार और नए तरीके से समस्या को समझने की जरूरत होती है, वहां इंसानी विशेषज्ञता की भूमिका बनी रह सकती है।
हालांकि, जिन कामों में एक ही तरह का काम बार-बार दोहराया जाता है और जिनमें ज्यादा रचनात्मकता या निर्णय क्षमता की जरूरत नहीं होती, उन्हें AI के जरिए ऑटोमेट करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
सिर्फ AI कोर्स करना ही नौकरी की गारंटी नहीं
प्रोफेसर आकाश सिन्हा का कहना है कि चार्टर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टर, नर्स, AI इंजीनियर, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट और वकील जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले लोगों के लिए अवसर बने रह सकते हैं।
लेकिन उनका कहना है कि इन पेशों में काम करने वालों को भी AI से दूरी नहीं बनानी चाहिए। उन्हें खुद AI टूल्स का इस्तेमाल सीखना चाहिए, ताकि वे अपने काम को ज्यादा तेजी और बेहतर तरीके से कर सकें।
हालांकि, वह इन करियर को भी पूरी तरह AI-proof नहीं मानते।
उनके मुताबिक, जिस व्यक्ति को अपने क्षेत्र में एक एक्सपर्ट के तौर पर देखा जाता है, उसकी भूमिका को AI से तुरंत रिप्लेस करना मुश्किल हो सकता है। लेकिन एंट्री लेवल और मिड लेवल पर काम करने वाले कर्मचारियों के सामने ज्यादा चुनौती हो सकती है।
ऐसे लोगों के लिए AI से बचने का रास्ता AI से दूरी बनाना नहीं, बल्कि AI को अपने काम का हिस्सा बनाना और अपनी विशेषज्ञता को लगातार मजबूत करना हो सकता है।
भविष्य AI और इंसानों के साथ काम करने का है
AI को लेकर सबसे बड़ी चिंता नौकरियों की है, लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है। AI जहां कुछ पारंपरिक कामों को कम कर सकता है, वहीं नई तकनीक से जुड़े नए काम और नई भूमिकाएं भी पैदा हो सकती हैं।
इसलिए 12वीं के बाद AI में करियर बनाने की सोच रहे छात्रों के लिए सिर्फ किसी एक कोर्स के नाम पर फैसला लेना पर्याप्त नहीं है। उन्हें अपनी रुचि, गणित और तकनीकी क्षमता, करियर लक्ष्य और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए कोर्स का चुनाव करना चाहिए।
वहीं जो लोग पहले से नौकरी कर रहे हैं, उनके लिए भी AI सीखना जरूरी होता जा रहा है। जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति AI इंजीनियर बने। लेकिन अपने क्षेत्र में AI टूल्स का सही इस्तेमाल करना सीखना आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण पेशेवर कौशल बन सकता है।
कुल मिलाकर, AI को सिर्फ नौकरियां छीनने वाली तकनीक के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। असली चुनौती उन लोगों के सामने है जो तकनीक के बदलते दौर के साथ खुद को अपडेट नहीं करते। वहीं जो लोग AI को समझकर अपनी मौजूदा विशेषज्ञता के साथ जोड़ लेते हैं, उनके लिए यही तकनीक नए करियर और रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकती है।









