JPSC मेधा घोटाले में CID की बड़ी कार्रवाई: 11 अभ्यर्थियों से 1.10 करोड़ लेने का खुलासा, अब 9 को नोटिस की तैयारी
राज्य ब्यूरो, रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे परीक्षा में पैसे के लेन-देन और अभ्यर्थियों को पास कराने के कथित नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं। मामले में गिरफ्तार बिचौलिये बुद्धेश्वर भगत से पूछताछ के बाद अब सीआईडी की नजर उन अभ्यर्थियों पर भी है, जिनसे कथित तौर पर परीक्षा में पास कराने के नाम पर पैसे लिए गए थे।
सीआईडी अब बुद्धेश्वर भगत द्वारा बताए गए 11 अभ्यर्थियों से पूछताछ कर उनका बयान दर्ज करने की तैयारी में है। जांच के अनुसार, इन अभ्यर्थियों से JPSC की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा पास कराने के एवज में कथित तौर पर 10-10 लाख रुपये लिए गए थे। इस तरह 11 अभ्यर्थियों से कुल 1.10 करोड़ रुपये की रकम लिए जाने की बात सामने आई है।
इन 11 अभ्यर्थियों में कपिल कुमार महतो, संतोष कुमार, वंदना कुमारी, दिलीप कुमार राणा, ओमप्रकाश राणा, शिवम सिंह, पवन कुमार मुंडा, राकी सचिन लकड़ा, रोशन केरकेट्टा और उमांकांत उरांव शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी में 11 नामों की बात है, जबकि दिए गए विवरण में 10 नाम ही स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। इसलिए शेष नाम की आधिकारिक पुष्टि जांच एजेंसी के रिकॉर्ड से होना बाकी है।
इनमें रोशन केरकेट्टा और उमाकांत उरांव को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और सीआईडी उनसे पूछताछ कर बयान दर्ज कर चुकी है। अब बाकी अभ्यर्थियों को भी जांच के दायरे में लाने की तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक, अन्य नौ अभ्यर्थियों को जल्द समन भेजा जा सकता है।
10 लाख रुपये में पास कराने का दावा, 11 अभ्यर्थियों से 1.10 करोड़ की वसूली
सीआईडी की पूछताछ में बुद्धेश्वर भगत ने कथित तौर पर बताया कि अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने के नाम पर रकम ली गई थी। उसके मुताबिक, 11 अभ्यर्थियों से 10-10 लाख रुपये लिए गए।
इस खुलासे के बाद जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि रकम किसके माध्यम से ली गई, पैसा कहां पहुंचा और इस कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे।
इससे पहले जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से यह भी सामने आया है कि 14वीं JPSC परीक्षा में 100 से अधिक अभ्यर्थियों को कथित तौर पर पैसे लेकर पास कराने की जानकारी पूछताछ में सामने आई है। वहीं JPSC की बैकलॉग परीक्षा में भी 50 से अधिक अभ्यर्थियों को पैसे लेकर पास कराने का दावा जांच में सामने आने की बात कही गई है। हालांकि इन दावों की अंतिम पुष्टि जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।
बुद्धेश्वर कैसे जुड़ा कथित सिंडिकेट से?
मूल रूप से लोहरदगा का रहने वाला बुद्धेश्वर भगत रांची के नामकुम स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में संविदा पर काम करता था। इसी दौरान उसके संपर्क में अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी के आने की बात सामने आई है।
अभय तिवारी JPSC की परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसी TSR Data Processing Private Limited (TDPL) में मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर काम कर चुका था। जांच एजेंसी के अनुसार, उसके ऊपर अभ्यर्थियों से संपर्क करने, परीक्षा में कथित सेटिंग कराने और इस नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पैसे पहुंचाने में भूमिका होने का आरोप है।
अभय तिवारी से पूछताछ के दौरान भी कथित तौर पर कई अभ्यर्थियों, बिचौलियों, एजेंसी से जुड़े लोगों और JPSC से जुड़े कुछ नामों की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी इन आरोपों और बयानों का सत्यापन कर रही है।
जांच के घेरे में कोचिंग संस्थान भी
JPSC मेधा घोटाले की जांच अब केवल अभ्यर्थियों और बिचौलियों तक सीमित नहीं रह गई है। सीआईडी को जांच के दौरान झारखंड के कई कोचिंग संस्थानों और उनके संचालकों की कथित भूमिका के बारे में भी जानकारी मिली है।
जांच एजेंसी को संदेह है कि कुछ कोचिंग संस्थान अभ्यर्थियों और कथित दलाली सिंडिकेट के बीच संपर्क की कड़ी के रूप में काम कर रहे थे। आरोप है कि इन संस्थानों के माध्यम से अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने का कथित सौदा किया जाता था और इसके बदले रकम ली जाती थी।
जांच में ऐसे संस्थानों और उनके संचालकों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। सीआईडी यह भी देख रही है कि कहीं इन संस्थानों का इस्तेमाल अभ्यर्थियों से रकम जुटाने या परीक्षा प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप के लिए तो नहीं किया गया।
रांची और हजारीबाग के कोचिंग संस्थानों पर छापेमारी
जांच के इसी सिलसिले में सीआईडी ने हाल ही में रांची और हजारीबाग के कोचिंग संस्थानों पर छापेमारी की।
रांची के लालपुर स्थित शिवांगन की पाठशाला और उसके निदेशक-संचालक संजीत कुमार के रातू रोड स्थित आवास पर तलाशी ली गई। इसके अलावा हजारीबाग स्थित मेघा कोचिंग सेंटर में भी जांच की गई।
छापेमारी के दौरान सीआईडी ने कई दस्तावेज और दूसरे रिकॉर्ड जब्त किए हैं। इन दस्तावेजों का अब सत्यापन किया जा रहा है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन संस्थानों का कथित तौर पर परीक्षा में सेटिंग, अभ्यर्थियों को पास कराने या परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े किसी अन्य तरीके से संबंध था या नहीं।
कोचिंग संचालकों पर भी कार्रवाई की तैयारी
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सीआईडी को कुछ अन्य कोचिंग संस्थानों और संचालकों के बारे में भी जानकारी मिली है। इनकी भूमिका की जांच और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया जारी है।
यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य सामने आते हैं, तो आने वाले दिनों में कुछ और कोचिंग संचालकों की गिरफ्तारी या उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
हालांकि, फिलहाल किसी भी कोचिंग संस्थान या व्यक्ति को केवल जांच में नाम आने के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता। अंतिम जिम्मेदारी और आरोप अदालत में साक्ष्यों के आधार पर ही तय होंगे।
अभय तिवारी से पूछताछ में भी सामने आए कई नाम
JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच में अभय कुमार तिवारी की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पूछताछ में उसने JPSC से जुड़े पूर्व पदाधिकारियों, परीक्षा संचालन एजेंसी के अधिकारियों-कर्मचारियों, बिचौलियों और कुछ अभ्यर्थियों के बारे में जानकारी दी है।
जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि अभ्यर्थियों से परीक्षा के अलग-अलग चरणों में अलग-अलग रकम मांगी जाती थी। कुछ मामलों में इंटरव्यू बोर्ड से संबंधित कथित सेटिंग के लिए रकम लेने और चयन तक कुल रकम कई लाख रुपये तक पहुंचने की बात सामने आई है।
सीआईडी इन दावों का सत्यापन बैंक लेन-देन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य, परीक्षा रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयान के आधार पर कर रही है।
जांच का दायरा JPSC से आगे भी बढ़ा
इस मामले की जांच के दौरान JPSC के अलावा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी कथित अनियमितताओं की जानकारी सामने आई है। अभय तिवारी से जुड़े मामले में JSSC की परीक्षाओं का भी उल्लेख हुआ है।
हाल ही में सीआईडी ने अभय तिवारी की पत्नी और उसके भाई को भी गिरफ्तार किया था। दोनों ने JSSC CGL परीक्षा पास की थी, जिसकी भर्ती प्रक्रिया भी जांच के दायरे में है। इस मामले में एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या उनकी सफलता और कथित परीक्षा नेटवर्क के बीच कोई संबंध था।
वहीं, JPSC मामले में सीआईडी द्वारा अब तक 100 से अधिक अभ्यर्थियों से पूछताछ किए जाने और करीब 20 अभ्यर्थियों को नोटिस दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
पैसे देकर परीक्षा पास कराने के कथित नेटवर्क की जांच
पूरी जांच से फिलहाल एक ऐसे कथित नेटवर्क की तस्वीर सामने आ रही है, जिसमें अभ्यर्थी, बिचौलिए, कोचिंग संस्थान और परीक्षा से जुड़े कुछ लोगों के बीच संपर्क की जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क का संचालन किस स्तर पर किया जाता था, अभ्यर्थियों तक बिचौलिए कैसे पहुंचते थे, रकम कैसे तय होती थी और कथित तौर पर पैसे लेने के बाद परीक्षा प्रक्रिया में किस तरह हस्तक्षेप किया जाता था।
बुद्धेश्वर भगत और अभय तिवारी से पूछताछ में सामने आए दावों को अब दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्यों से मिलाया जा रहा है। यही साक्ष्य आगे की कानूनी कार्रवाई में महत्वपूर्ण होंगे।
अभ्यर्थियों के बयान से खुल सकते हैं कई राज
अब सीआईडी के सामने सबसे महत्वपूर्ण कड़ी उन अभ्यर्थियों के बयान हैं, जिनके नाम बुद्धेश्वर भगत ने बताए हैं। एजेंसी उनसे यह जानना चाहती है कि उन्हें किसने संपर्क किया था, कितनी रकम मांगी गई, रकम किसे दी गई और क्या उन्हें परीक्षा में किसी तरह की विशेष सुविधा या मदद का आश्वासन दिया गया था।
इसके साथ ही सीआईडी यह भी जांचेगी कि कथित तौर पर लिए गए पैसे का इस्तेमाल किस तरह किया गया और इस रकम में अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।
रोशन केरकेट्टा और उमाकांत उरांव से पूछताछ पहले ही हो चुकी है। अब बाकी नौ अभ्यर्थियों के बयान सामने आने के बाद जांच की दिशा और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
आगे क्या?
JPSC मेधा घोटाले की जांच अब एक बड़े नेटवर्क की संभावित भूमिका तक पहुंच चुकी है। एक तरफ अभ्यर्थियों से पूछताछ और कथित पैसे के लेन-देन की जांच हो रही है, तो दूसरी तरफ कोचिंग संस्थानों, बिचौलियों और परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।
सीआईडी के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती यह है कि पूछताछ में सामने आए आरोपों को ठोस साक्ष्यों से साबित किया जाए। 11 अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 1.10 करोड़ रुपये की वसूली, कोचिंग संस्थानों पर छापेमारी और परीक्षा नेटवर्क से जुड़े कई नाम सामने आने के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां तथा नए खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।









