जमशेदपुर। देश की सीमाओं पर दुश्मनों का सामना करने वाले कारगिल योद्धा और पूर्व सैनिक सत्येंद्र सिंह आज सामाजिक न्याय, पारदर्शिता और जनहित के मुद्दों पर अपनी सक्रिय भूमिका के लिए पहचान रखते हैं। सेना में लंबे समय तक सेवा देने के बाद उन्होंने समाज के कमजोर और वंचित वर्गों की आवाज को बुलंद करने का कार्य जारी रखा है।
सत्येंद्र सिंह भारतीय सेना में रहते हुए वर्ष 1987 में ऑपरेशन मेघदूत के दौरान सियाचिन ग्लेशियर जैसे दुर्गम क्षेत्र में तैनात रहे। माइनस 40 से 50 डिग्री तापमान में देश की सुरक्षा के लिए उन्होंने अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध में भी उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर कार्य करना शुरू किया।

उनके सामाजिक जीवन का सबसे चर्चित प्रकरण जुगसलाई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चार नवजात शिशुओं की मौत से जुड़ा मामला रहा। सत्येंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि रात्रि पाली में चिकित्सक की अनुपस्थिति और स्वास्थ्य व्यवस्था में लापरवाही के कारण यह दुखद घटना हुई। उन्होंने इस मामले की लिखित शिकायत तत्कालीन उपायुक्त और सिविल सर्जन को सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की।
सत्येंद्र सिंह के अनुसार शिकायत के बाद उन्हें विरोध और दबाव का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने मामले को आगे बढ़ाया और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), नई दिल्ली में शिकायत दर्ज कराई। आयोग के हस्तक्षेप के बाद मामले की जांच हुई, जिसमें स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारियों को लेकर गंभीर प्रश्न उठे। जांच के उपरांत मृत नवजात शिशुओं के परिजनों को झारखंड सरकार की ओर से मुआवजा प्रदान किया गया, जिसे पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।
उन्होंने बताया कि जनहित के मुद्दों को उठाने के कारण उन्हें कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। एक मामले में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया, लेकिन बाद में न्यायालय में उन्हें राहत मिली और वे आरोपों से मुक्त हुए। सत्येंद्र सिंह का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति जनहित में आवाज उठाता है तो उसे अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन सत्य और न्याय के लिए संघर्ष जारी रहना चाहिए।



समाज सेवा और जनहित के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें विभिन्न अवसरों पर सम्मानित भी किया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, विधायक पूर्णिमा दास साहू, सांसद बिधुत बरण महतो, अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) जमशेदपुर तथा सैनिक कल्याण विभाग के अधिकारियों सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने उनके कार्यों की सराहना की है।
सत्येंद्र सिंह का मानना है कि देश सेवा केवल सीमा पर ही नहीं, बल्कि समाज के भीतर अन्याय, भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाकर भी की जा सकती है। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि एक सैनिक की जिम्मेदारी वर्दी उतरने के बाद भी समाप्त नहीं होती, बल्कि वह समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को नए रूप में आगे बढ़ा सकता है।
आज सत्येंद्र सिंह की पहचान एक पूर्व सैनिक, सामाजिक कार्यकर्ता और जनहित के मुद्दों को मुखरता से उठाने वाले नागरिक के रूप में है। उनकी संघर्ष यात्रा अनेक लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।






